हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित राधा स्वामी सत्संग ब्यास विवाद के घेरे में आ गया है। इस विवाद के पीछे की मुख्य वजह है सत्संग के विस्तार कार्य। हाल ही में हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HP SPCB) ने 25 अप्रैल को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) को एक रिपोर्ट सौंपी जिसमें एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।
इस रिपोर्ट से ये पता चला है कि सत्संग ब्यास ने अपने विस्तार कार्यों के लिए न तो पहाड़ों की कटाई के लिए कोई वैधानिक अनुमति ली और न ही टाउन प्लानिंग विभाग से किसी भी तरह की कोई मंजूरी ली। इस तरह नियमों की अनदेखी करके जो विस्तार कार्य हुआ है उससे पर्यावरण को गहरी क्षति पहुंची है।
अवैध कटाई और मामूली जुर्माना
जांच रिपोर्ट के अनुसार से 35 हरे-भरे पेड़ों को अवैध रूप से काटने का मुद्दा उठाया गया है। मगर हैरानी की बात ये है कि इतने बड़े उल्लंघन पर प्रशासन ने सिर्फ 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया। इस जुर्माने को पेड़ों की लकड़ी की बाजारी कीमतों के सामने बेहद कम बताया जा रहा है। स्थानीय निवासियों के शिकायत के बाद (NGT) ने संज्ञान लिया और जांच में यह पाया कि पहाड़ों कि कटाई से निकला भारी मलबा घनेटा, धोरन, बल्ला और दरांग को प्राकृतिक पानी के स्त्रोतों में फेंका गया। इससे भविष्य में जल संकट का भी खतरा पैदा हो सकता है।
कमजोर दीवारें और मलबा बढ़ा सकता है मुश्किलें
जांच में सामने आया है कि नाले के किनारे बनाई गई सुरक्षा दीवारें उतनी मजबूत नहीं हैं, जितनी होनी चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया है कि मानसून के दौरान मलबे और तेज पानी का दबाव बढ़ने पर ये दीवारें जवाब दे सकती हैं, जिससे बाढ़ या भूस्खलन जैसी गंभीर स्थिति बन सकती है।
सैटेलाइट तस्वीरों से भी संकेत मिले हैं कि निर्माण के दौरान प्राकृतिक जलधाराओं के रास्ते में बदलाव किया गया। कागजों में हालात सामान्य दिखाए गए हैं, लेकिन जमीन पर जमा मलबा आने वाले दिनों में बड़ा खतरा बन सकता है।
नोटिस के बाद भी नहीं रुका काम, ग्रामीणों का गुस्सा बढ़ा
जांच में यह भी सामने आया कि कई बार चेतावनी और नोटिस मिलने के बावजूद काम नहीं रोका गया। 7 अप्रैल 2026 को दोबारा निरीक्षण में भी सुरक्षा इंतजाम बेहद कमजोर पाए गए, जिसके बाद अधिकारियों ने फिर से नोटिस जारी किए।
अब संबंधित संगठन से कहा गया है कि जियो-टैग तस्वीरों के साथ पूरे इलाके को पहले जैसी स्थिति में लाने की ठोस योजना पेश करे। वहीं, ग्रामीणों का आरोप है कि उन पर दबाव बनाकर जमीन ली गई, जिससे इलाके में नाराजगी और तनाव का माहौल है। अब सबकी नजर इस मामले में एनजीटी के अगले फैसले पर टिकी है।



